
पर्यावरण का कैंसर, पॉलीथिन प्राचीन हिंदू प्रकृति पूजा में लीन थे और वे वन, वनस्पति, नदी, वृक्ष, महासागर, समुद्र, पौधा, पर्वत, सूर्य, चाँद, बारिश, पृथ्वी, अग्नि, आकाश, हवा यहाँ तक कि पत्थर की भी पूजा करते थे। क्योंकि प्राकृतिक घटक का यह एक-एक अंग है। इसलिए भारतवासी होने के नाते हमारा सांस्कृतिक फर्ज़ बनता है कि हम पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखें। आधुनिक दुनिया में प्लास्टिक या पॉलीथिन पर्यावरण प्रदूषण को चरम सीमा तक ले गया है। जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सभी प्रकार के प्रदूषण को गति देता है। हम इस प्रदूषणकारी प्लास्टिक को आकार के अनुसार चार भागों में बांटते हैं: नैनोप्लास्टिक (१-१००० नैनोमीटर), माइक्रोप्लास्टिक (१-१००० माइक्रोमीटर), मेसो प्लास्टिक (१-१० मिलीमीटर), मैक्रो प्लास्टिक (>१ सेंटीमीटर से अधिक)। फेंका गया प्लास्टिक तापमान और पर्यावरण के विभिन्न रासायनिक संपर्क में आकर सूक्ष्म-सूक्ष्म प्लास्टिक कणों में परिवर्तित हो जाता है। विज्ञान की भाषा में इसे माइक्रोप्लास्टिक या प्लास्टिक फाइबर कहते हैं। चूंकि प्लास्टिक लंबी पॉलिमर श्रृंखला से बना होता है, इसलिए यह आसानी से अपघटित नहीं होता है। वर्तमान में वायुमंडल, फेफड़ों, जल निकायों और समुद्र सब जगह ही माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। यहाँ तक कि आधुनिक वॉटर फ़िल्टर के माध्यम से भी जल से माइक्रोप्लास्टिक को दूर नहीं किया जा सकता है। हमारे शरीर में भोजन के माध्यम से प्रवेश करके यह माइक्रोप्लास्टिक आमतौर पर डीएनए, आरएनए के साथ बंध जाता है और डीएनए की श्रृंखला को तोड़ देने की कोशिश करता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में स्थायी रूप से विभिन्न समस्याएं दिखाई देती हैं। लिवर, थायरॉइड, त्वचा, किडनी को सबसे पहले प्रभावित करता है। इसके अलावा रक्तहीनता, कैंसर, मोतियाबिंद की समस्या दिखाई देती है। महिलाओं के एस्ट्रोजन हार्मोन के स्राव में बाधा डालता है। प्रजनन क्षमता को घटाता है। जन्मजात त्रुटियों के साथ बच्चे जन्म लेते हैं। फेफड़ों की समस्या और हृदय रोग बहुत कम उम्र में ही दिखाई दे रहे हैं। प्लास्टिक जलाने के परिणामस्वरूप भारी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से जैसे हमारे शरीर को नुकसान पहुँचाती हैं, वैसे ही पर्यावरण में हानिकारक ग्रीनहाउस प्रभाव और जलवायु परिवर्तन करती हैं। पानी और ज़मीन पर प्लास्टिक लंबे समय तक पड़े रहने के कारण मिट्टी के नीचे पानी के प्रवेश में बाधा उत्पन्न होती है। इसके अलावा प्लास्टिक विभिन्न तरीकों से जलीय जीवों को नष्ट कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को व्यापक नुकसान पहुँच रहा है। कई जीव पृथ्वी से विलुप्त हो रहे हैं। ये प्लास्टिक अपशिष्ट उपजाऊ मिट्टी को भी नष्ट कर देते हैं। खुली जगह में प्लास्टिक पड़े रहने के कारण पर्यावरण दूषित हो रहा है और यह मच्छर-मक्खियों का प्रजनन स्थल बन रहा है। नालियों की व्यवस्था में यह राक्षस पॉलीथिन तरह-तरह की जटिलताएँ पैदा कर रहा है। इसके कारण जलभराव और बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना, प्लास्टिक का उपयोग घटाना, पुनर्चक्रण (Recycle) और पुनरुप्रयोग (Reuse) योग्य बनाना और सबसे महत्वपूर्ण बात खुद के सही काम का पालन करना बहुत ज़रूरी है। प्लास्टिक बैग में बाज़ार न करें एवं अपने साथ हमेशा एक जूट का बैग या कपड़े का बैग रखें। खाद्य संरक्षण के लिए धातु या कांच के बर्तन का उपयोग करें। उपयोग के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करके मल्टी यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जा सकता है। प्लास्टिक कचरे को न जलाना और इसे सही तरीके से हटाने के लिए सरकार की सहायता करना और सहयोग करना चाहिए। फेंके गए प्लास्टिक से रचनात्मक कार्य किए जाने चाहिए। प्लास्टिक उन्मूलन को लेकर हमें क्या करना चाहिए, इस पर आपस में चर्चा करें। व्यक्तिगत पहल पर बैनर बनाकर मोहल्ले में लगाएं। स्कूल के छात्र-छात्राओं के बीच प्रचार करें। इस प्रचार में बच्चों को शामिल करें। प्रत्येक व्यक्ति का धर्म है कि वह सभी दुष्कर्मों के लिए नेताओं/राजनीतिज्ञों से जवाब मांगे। उन्हें यह समझाना और खुद भी समझना होगा कि हम अपने भविष्य के लिए क्या कर रहे हैं और क्या छोड़ कर जा रहे हैं। विभिन्न सोशल मीडिया पर इसके दुष्परिणामों के बारे में प्रचार करें। प्रशासन को इस विषय में आम नागरिक के रूप में जागरूक करें। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जागरूक करें। वे अपने पॉलीथिन यहाँ-वहाँ न फेंककर एक निर्दिष्ट स्थान पर अपने नियंत्रण में जमा करें और बाद में उसे निर्दिष्ट "गैर-बायोडेग्रैडेबल" (Non-biodegradable) डस्टबिन में डालें। दुकानों के सामने एक पॉलीथिन फेंकने की टोकरी रखें। किसी बहुत महत्वपूर्ण विशेष मोहल्ले, बस्ती या गाँव को चिन्हित करके व्यक्तिगत पहल पर उसे प्लास्टिक मुक्त करें। स्वयं और अपने परिवार को प्लास्टिक या पॉलीथिन मुक्त जीवन जीने का अभ्यस्त बनाएं। हम सब जागरूक होंगे। सभी को जागरूक करेंगे। और जागरूकता का काम सबसे पहले खुद से शुरू करेंगे। यही संकल्प हम लेते हैं। प्रचारक - पर्यावरण, तारकेश्वर।

