Kamlesh bishnoi
Kamlesh bishnoi Verified
25d agoNH15, Phalodi, Rajasthan

आज मैंने “Nature Art from Fallen Leaves” गतिविधि की। 🍂🌱🦋 इस गतिविधि का उद्देश्य प्रकृति में पहले से उपलब्ध चीज़ों का रचनात्मक उपयोग करना और यह समझना था कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता केवल पौधे लगाने या सफाई करने तक सीमित नहीं है। हम प्रकृति के साथ रहते हुए उसकी छोटी-छोटी चीज़ों से भी सीख सकते हैं। मैंने इस गतिविधि के लिए पेड़-पौधों से गिरे हुए सूखे और छोटे पत्तों को चुना। मैंने किसी पेड़ या पौधे से पत्ते तोड़ने की जरूरत नहीं समझी, क्योंकि हमारा उद्देश्य प्रकृति से कुछ लेना नहीं, बल्कि प्रकृति में पहले से गिरी हुई सामग्री का रचनात्मक उपयोग करना था। मैंने अलग-अलग आकार और रंग के गिरे हुए पत्तों को ध्यान से देखा। कुछ पत्ते हरे थे, कुछ पीले, कुछ भूरे और कुछ हल्के लाल रंग के दिखाई दे रहे थे। इन पत्तों को देखकर मुझे महसूस हुआ कि प्रकृति अपने आप में एक कलाकार है। हर पत्ता अपने आकार, रंग, बनावट और नसों के कारण अलग दिखाई देता है। सामान्य रूप से हम सूखे पत्तों को केवल कचरा समझ लेते हैं, लेकिन थोड़ी कल्पना करने पर इन्हीं पत्तों से सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल कला बनाई जा सकती है। इस गतिविधि में मैंने छोटे-छोटे पत्तों और पतली टहनियों की मदद से एक पेड़ और एक तितली का प्राकृतिक चित्र बनाया। पेड़ बनाने के लिए मैंने छोटी सूखी टहनियों को तने और शाखाओं की तरह व्यवस्थित किया। इसके बाद छोटे-छोटे गिरे हुए पत्तों को शाखाओं के आसपास इस तरह रखा कि वे पेड़ की हरी-पीली पत्तियों जैसी दिखाई दें। मैंने कोशिश की कि डिजाइन प्राकृतिक लगे और उसमें अनावश्यक सजावटी सामग्री का इस्तेमाल न हो। इसके साथ मैंने गिरे हुए पत्तों से एक छोटी तितली भी बनाई। तितली के पंखों के लिए अलग-अलग रंग और आकार के छोटे पत्तों का उपयोग किया गया। बीच में एक पतली टहनी को शरीर की तरह रखा गया और छोटी टहनियों की मदद से एंटीना का आकार बनाया गया। इस तरह एक ही गतिविधि में मुझे पेड़ और तितली दोनों बनाने का अवसर मिला। इस गतिविधि से मुझे सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझ आई कि प्रकृति में बेकार जैसी दिखने वाली चीज़ भी उपयोगी हो सकती है। सूखे पत्ते पेड़ों के जीवन चक्र का प्राकृतिक हिस्सा हैं। जब पत्ते गिरते हैं, तो वे धीरे-धीरे मिट्टी में मिलकर जैविक पदार्थ का हिस्सा बन सकते हैं। इसलिए हर सूखे पत्ते को कचरा समझकर तुरंत हटाना जरूरी नहीं है। उचित जगह पर पड़े प्राकृतिक पत्ते मिट्टी के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। Nature Art बनाने से मेरी रचनात्मक सोच को भी बढ़ावा मिला। शुरुआत में मुझे लगा कि छोटे पत्तों से कोई साफ आकृति बनाना कठिन होगा, लेकिन जब मैंने पत्तों को ध्यान से देखना शुरू किया तो अलग-अलग आकारों में कई संभावनाएँ दिखाई देने लगीं। किसी पत्ते को पंख की तरह रखा जा सकता था, किसी को पेड़ की पत्ती की तरह और किसी छोटी टहनी को शाखा की तरह इस्तेमाल किया जा सकता था। इस गतिविधि का एक और अच्छा पहलू यह था कि इसमें प्लास्टिक की सजावट, थर्माकोल या अन्य कृत्रिम सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ी। मैंने जितना संभव हो सका, प्राकृतिक और पहले से गिरी हुई सामग्री का ही उपयोग किया। इससे यह गतिविधि पर्यावरण-अनुकूल बनी। आज की गतिविधि ने मुझे यह भी सिखाया कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं होता। हम अपने घर, स्कूल और आसपास के वातावरण में छोटे-छोटे काम करके भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी दिखा सकते हैं। जब हम चीज़ों को फेंकने से पहले उनके दोबारा उपयोग के बारे में सोचते हैं, तब हम संसाधनों की बचत करने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हैं। मैंने इस गतिविधि के दौरान आसपास के पेड़-पौधों को भी ध्यान से देखा। पहले मैं शायद केवल एक सामान्य बगीचे या पेड़ को देखता, लेकिन इस बार मैंने पत्तियों के आकार, रंग, टहनियों और पौधों की विविधता पर ध्यान दिया। इससे मुझे प्रकृति को देखने का एक नया तरीका मिला। तितली का चित्र बनाते समय मुझे परागणकर्ताओं और जैव विविधता की याद भी आई। तितलियाँ, मधुमक्खियाँ और अन्य छोटे जीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। फूलों वाले पौधे और स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण उनके लिए उपयोगी हो सकते हैं। इसलिए पेड़-पौधों की रक्षा करना केवल पेड़ों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े अनेक जीवों के लिए भी वातावरण सुरक्षित रखना है। पेड़ का चित्र बनाते समय मुझे पेड़ों की उपयोगिता के बारे में सोचने का अवसर मिला। पेड़ हमें छाया देते हैं, कई जीवों को आश्रय देते हैं, मिट्टी को स्थिर रखने में मदद करते हैं और वातावरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए एक छोटा-सा पत्तों का पेड़ बनाना मेरे लिए केवल कला की गतिविधि नहीं था, बल्कि पेड़ों के महत्व को याद करने का एक तरीका भी था। इस गतिविधि में मैंने यह भी सीखा कि किसी चीज़ को सुंदर बनाने के लिए हमेशा महंगे सामान की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी प्रकृति में उपलब्ध साधारण चीज़ें ही सबसे सुंदर रचनाएँ बनाने में मदद कर सकती हैं। गिरे हुए छोटे पत्ते, सूखी टहनियाँ, मिट्टी और आसपास का प्राकृतिक वातावरण मिलकर एक सुंदर दृश्य बना सकते हैं। मैं चाहता हूँ कि ऐसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चे और युवा प्रकृति के करीब आएँ। जब हम स्वयं कोई पर्यावरण-अनुकूल गतिविधि करते हैं, तो हमें उसके पीछे की सोच भी समझ आती है। केवल किसी पोस्टर पर “Save Nature” लिखना और वास्तव में प्रकृति से जुड़कर कुछ करना अलग अनुभव है। इस गतिविधि में एक और महत्वपूर्ण बात थी—पत्ते तोड़ना नहीं। मैंने केवल गिरे हुए पत्तों का उपयोग किया। इसका कारण यह है कि अगर हम प्रकृति से कला बनाने के लिए जीवित पौधों से पत्ते तोड़ेंगे, तो हमारी गतिविधि का उद्देश्य ही कमजोर हो जाएगा। हमारा संदेश प्रकृति की रक्षा का होना चाहिए, न कि प्रकृति को नुकसान पहुँचाने का। इसलिए मेरा संदेश है कि जब भी हम Nature Art बनाएँ, हमें पहले से गिरी हुई प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा ऐसी सामग्री भी नहीं चुननी चाहिए जो किसी जीव या प

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