
पर्यावरण संरक्षण – मेरा जीवन, मेरा संकल्प विज्ञान की छात्रा होने के कारण बचपन से ही प्रकृति के संतुलन और पर्यावरण के महत्त्व को समझने का अवसर मिला। यही कारण है कि कॉलेज जीवन से ही मैंने पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का एक स्वाभाविक संकल्प बना लिया। हम जो भी फल खाते हैं, उनके बीजों को सहेजकर सुखाते हैं, उनसे पौधे तैयार करते हैं और फिर जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ तथा अन्य शुभ अवसरों पर उन्हें उपहार स्वरूप भेंट करते हैं। घर में आने वाले प्लास्टिक के किसी भी उपयोगी कंटेनर को कभी व्यर्थ नहीं फेंकते। उनमें छेद कर, मिट्टी भरकर, उन्हें सजाकर सुंदर गमले तैयार करते हैं। "वेस्ट टू बेस्ट" की यह सोच वर्षों से मेरे जीवन का हिस्सा रही है। आज भी कोई भी उपयोगी कंटेनर बिना पुनः उपयोग किए नहीं फेंका जाता। जहाँ भी स्वदेशी जागरण मंच या अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में जाने का अवसर मिलता है, वहाँ बच्चों और परिवारों को पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश सहज रूप से देती हूँ। मेरा विश्वास है कि पर्यावरण की रक्षा केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों से होती है। सौंदर्य विशेषज्ञ होने के नाते मैं सदैव रसायन-मुक्त (केमिकल-फ्री) जीवनशैली को अपनाने और बढ़ावा देने का प्रयास करती हूँ। मिट्टी, वनस्पतियों और प्राकृतिक संसाधनों से बने उत्पाद न केवल सौंदर्य को निखारते हैं, बल्कि हमारी भूमि, जल और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखते हैं। पिछले अनेक वर्षों में लाखों लोगों को प्राकृतिक एवं स्वदेशी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का सौभाग्य मिला है। हमारे घर में सदैव बेल, जामुन, आम तथा विभिन्न सब्जियों के सैकड़ों पौधे तैयार किए जाते हैं और उन्हें समाज में निःशुल्क वितरित किया जाता है। मेरा विश्वास है कि ईश्वर ने जो सेवा का अवसर दिया है, उसे सहज भाव से समाज तक पहुँचाना ही सच्चा कर्तव्य है। इसलिए किसी भी कार्यक्रम में स्मृति-चिह्न के स्थान पर पौधा भेंट करना हमारी परंपरा बन चुकी है। घर में जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ, पितृ दिवस अथवा अन्य पारिवारिक अवसरों पर भी परिवारजनों और बच्चों के साथ मंदिरों एवं उद्यानों में पौधारोपण करते हैं। हमारे यहाँ आने वाले अतिथियों को भी उपहार स्वरूप पौधा अवश्य दिया जाता है, ताकि वे भी हरियाली के इस अभियान का हिस्सा बनें। मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदि प्रत्येक परिवार छोटी-छोटी पहल करे—जैसे पौधे लगाना, पानी का सम्मान करना, प्लास्टिक का पुनः उपयोग करना और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहना—तो हर घर हरित बनेगा और हमारा भारत स्वच्छ, स्वस्थ एवं पर्यावरण-संपन्न राष्ट्र बनेगा।

