45 डिग्री तापमान और भीषण गर्मी में भी कुआँ की शीतल मीठे जल आज के समय में जल स्तर का बने रहना और इनके आस पास बड़े पेड़ पौधे होना दर्शाता है कि जल स्तर को बनाएं रखने में पेड़ो की महत्वपूर्ण भूमिका है। ये कुआं छत्तीसगढ़ मुंगेली जिला के ग्राम पीपरखूंटा की है, मैं इस कुआं के पास 3 वर्ष पूर्व भी ब्लीचिंग पाउडर डालकर जल संरक्षण के लिए आया था तब शीतल शुद्ध और तृप्त कर देने वाला जल मिला था।इसलिए आप सभी से आग्रह है कि इस बरसात अधिक से अधिक पौधा लगाएं और उसे पेड़ बनाने तक उनकी संरक्षण करें जिससे, जल फल छाया और ऑक्सीजन सभी जीव जगत को मिल सके। आपके द्वारा रोपित और संरक्षित एक पौधा न जाने कितनों जीव जंतु की जीवन बचा सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ जल संरक्षण की अति आवश्यकता है, अभी वर्षा जल को वॉटर हार्वेस्टिंग द्वारा, कुआं, बावड़ी, तालाब, पोखर में संरक्षित करें, नदियों में भी चेक डैम बनाकर जल संरक्षण करें व्यर्थ न बहने दें। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि छत्तीसगढ़ प्रांत

