बीजारोपण से वृक्षारोपण - पश्चिम महाराष्ट्र
यह उपक्रम नगर संयोजक की पहल पर सांगली शहर में किया गया है । त्योहारों, समारोहों, घरेलू कार्यक्रमों, जन्मदिनों जैसे अवसरों पर बीजारोपण का प्रयास किया गया। बीजारोपण के लिए कप कचरे से एकत्र किये गये । रामलला प्रतिष्ठापना अक्षत देने की शुरवात कारसेवक द्वारा बीजारोपण करके शुरू कि गयी । अपने परिवार के शादी मे बीजारोपण के 350 कप और 3 ट्रे शादी में आए मेहमानों से तैयार कराए । मिरज की प्रसिद्ध व्याख्यानमाला में प्रतिदिन एक वक्ता द्वारा 30 दिनों तक बीजारोपण किया गया। जब ये पौधे बड़े हो गए तो इन्हें सम्मानित करने वाले गणमान्य व्यक्तियों को इन्हें वृक्षारोपण के लिए दे दिया। आम की गुठलियाँ एकत्र करने का एक अभिनव कार्यक्रम चलाया गया। इनमें रोटरी क्लब मिरज के माध्यम से 10 से अधिक संग्रह करने वाले विद्यार्थी को प्रमाण पत्र दिया गया। आषाढ़ी एकादशी के दिन कृषि महाविद्यालय मे कूड़े-कचरे से प्राप्त 2501 गुठलीयो का बिजारोपण किया गया। रोटरी क्लब, मिरज, चितले उद्योग समूह, उगर शुगर आदि के सहयोग से 8501 गुठलीयो को एक एनजीओ को बिजारोपण के लिए मुंबई भेजा गया। इसमें कई स्कूलों ने उपक्रम मे हिस्सा लिया. 10 से अधिक पौधे करने वाले विद्यार्थियों को स्कूली गतिविधियों में 100% अंक दिलाने की योजना शुरू की गई। नगर निगम द्वारा बीज से निर्मित वृक्षारोपण हेतु 1250 पौधे दिये गये। इस प्रकार समाज में बीजारोपण जनमानस में जड़ें जमाने लगा है।
